
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी और नए टैरिफ उपायों व राजनीतिक योजनाओं के साथ गुरुवार को भी यह सिलसिला जारी रखा। उन्होंने रूस पर यूक्रेन के साथ शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव डाला, लेकिन गाज़ा पर पूरा नियंत्रण हासिल करने की इज़राइल की योजना से दूरी बनाई। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे और खून-खराबा हो सकता है, जबकि इस क्षेत्र में मानवीय सहायता अभी-अभी फिर से शुरू हुई थी। ट्रंप ने उत्तर कोरिया और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं की आलोचना जारी रखी और रूस को परोक्ष रूप से चेतावनी भी दी।
इन तनावों के बावजूद, अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ और वॉल स्ट्रीट में कारोबार बढ़त के साथ बंद हुआ। टेक्नोलॉजी शेयरों ने इसकी अगुवाई की। Apple Inc. के शेयरों में तेज़ी आई, क्योंकि भारत से अमेरिका को उसके उत्पादों के निर्यात पर टैरिफ़ छूट मिली। यह Apple की पहले की $500 बिलियन की प्रतिबद्धता के अलावा $100 बिलियन के निवेश की घोषणा के बाद हुआ। इसी तरह, ताइवान को चिप्स और सेमीकंडक्टर पर अमेरिकी टैरिफ़ से छूट मिली, जिससे टेक शेयरों को बढ़ावा मिला और एशियाई बाज़ार ऊपर चढ़े। यह सब तब हुआ, जब रूस से भारत के लगातार तेल आयात के जवाब में ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ़ 25% से दोगुना करके 50% कर दिया।
मौद्रिक नीति के मोर्चे पर, मिनियापोलिस फ़ेड के अध्यक्ष नील काश्करी, सैन फ़्रांसिस्को फ़ेड की अध्यक्ष मैरी डेली, बोस्टन फ़ेड की अध्यक्ष सुसान कॉलिन्स और फ़ेडरल रिज़र्व की गवर्नर लिसा डी. कुक की नरम रुख वाली टिप्पणियों से जोखिम से बचने की भावना कम हुई। उनके नरम रुख और अमेरिका के कमज़ोर रोज़गार व आर्थिक गतिविधि के आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दर में 0.25% कटौती की बाज़ार की उम्मीदों को मज़बूत किया। 2025 में दो और कटौतियों की उम्मीद है। हालांकि, फ़ेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा कि भविष्य के फ़ैसले आंकड़ों पर निर्भर रहेंगे। उन्होंने FOMC के बाद हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भी यही बात दोहराई।
व्यापार से जुड़ी खबरों में, ट्रंप ने कहा कि उनकी चीन और जापान पर कुछ टैरिफ़ हटाने की योजना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि और विशिष्ट शर्तें अभी लंबित हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चीन पर आगे और टैरिफ़ लगाए जाने के जोखिम को कम करके आंका, लेकिन जापान का ज़िक्र नहीं किया। इस बीच, व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने कहा कि रूस अपने सामान के निर्यात के लिए भारत को एक “निकास का रास्ता” मानता है, ख़ासकर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वह अगले हफ्ते रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात करेंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है कि यह आमने-सामने की मुलाकात होगी या वर्चुअल कॉल।
ऊर्जा बाज़ार की बात करें तो, अमेरिका के साप्ताहिक क्रूड ऑयल इन्वेंटरी में उम्मीद से ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इससे तेल की कीमतों को बढ़ावा नहीं मिला। मांग को लेकर चिंताओं और OPEC+ के बढ़ते उत्पादन का असर, भू-राजनीतिक कारणों से आपूर्ति में जोखिम पर भारी पड़ा। अलग से, सऊदी अरब ने एशिया के लिए तेल की कीमतें बढ़ाईं। उसे उम्मीद है कि इससे भारत में बढ़ती मांग और अमेरिका के बढ़ते टैरिफ़ से फ़ायदा होगा।
आर्थिक आँकड़ों में, ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष जून में बेहतर हुआ। वहीं, चीन का जुलाई का निर्यात (अमेरिकी डॉलर के हिसाब से) साल-दर-साल 7.2% बढ़ा, जो 5.4% के अनुमान से अधिक था।
इस सबके बीच, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) पर दबाव बना हुआ है। दो दिन की बढ़त का सिलसिला टूटने के बाद यह एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे वैश्विक व्यापार और राजनीतिक जोखिमों के बावजूद प्रमुख करेंसी और ऑस्ट्रेलियाई व न्यूज़ीलैंड डॉलर (AUD, NZD) में बढ़त आई। कमोडिटी में मिला-जुला कारोबार हुआ, जबकि इक्विटी और बॉन्ड यील्ड में मामूली बढ़त रही। हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी में हल्की गिरावट आई और वे अपनी साप्ताहिक रेंज में ही बनी रहीं। कमजोर डॉलर या इस सेक्टर के प्रति ट्रंप प्रशासन के समर्थन वाले रुख से उन्हें खास फायदा नहीं हुआ।
अमेरिकी डॉलर की कमज़ोरी, यूरोज़ोन की मज़बूत रिटेल सेल्स और कुछ शर्तें पूरी होने पर ट्रंप द्वारा EU टैरिफ़ को 30% से घटाकर 15% करने की चर्चाओं ने EURUSD को समर्थन दिया। इससे यह पेयर लगातार तीसरे दिन ऊंचाई पर बना रहा और सप्ताह के उच्च स्तर के करीब पहुंच गया।
इस बीच, हाल की गिरावट के बाद USDJPY पर दबाव बना हुआ है, हालांकि गिरावट की रफ़्तार धीमी पड़ रही है। जापान में राजनीतिक तनाव और टोक्यो पर अमेरिका के संभावित नए टैरिफ़ को लेकर चिंताओं के कारण यह पेयर कमजोर USD से फायदा नहीं उठा पा रहा है। इसके अलावा, Bank of Japan (BoJ) की दरों में बढ़ोतरी और Federal Reserve की संभावित दर कटौती को लेकर मिली-जुली उम्मीदों के साथ-साथ जापान के जून के Coincident Index और Leading Economic Index के मजबूत आंकड़े भी इस पेयर पर दबाव डाल रहे हैं। हालांकि, बाज़ार की घबराहट आगे की गिरावट को सीमित कर रही है।



GBPUSD लगातार पाँचवें दिन बढ़ा और एक सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुँच गया। यह तब हुआ, जब अमेरिका-ब्रिटेन व्यापार समझौते पर कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (BoE) से आज के नीतिगत फैसले में ब्याज दरों में 0.25% की कटौती की व्यापक उम्मीद है।
ट्रेडर्स को BoE के नरम रुख अपनाने की उम्मीद है। “सुपर थर्सडे” में निराशाजनक आर्थिक अनुमान जारी होने की संभावना है। फिर भी, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ही पाउंड की मजबूती का मुख्य कारण बनी हुई है, जिससे घरेलू अनिश्चितताओं के बावजूद GBPUSD मज़बूत बना हुआ है।
कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, उम्मीद से बेहतर ऑस्ट्रेलिया के व्यापार आंकड़ों (जून) और चीन के मज़बूत व्यापार आंकड़ों (जुलाई) के समर्थन से AUDUSD लगातार तीसरे दिन बढ़ा और साप्ताहिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
न्यूज़ीलैंड डॉलर (NZD) भी लगातार दूसरे दिन चढ़ा और घरेलू स्तर पर कोई बड़ा आँकड़ा न होने के बावजूद, इस हफ़्ते के उच्च स्तर को परखने लगा।
इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद USDCAD लगातार पांचवें सत्र में गिरा। कमजोर USD, अमेरिका-कनाडा ट्रेड डील की उम्मीदों और शुक्रवार को जारी होने वाली कनाडा की रोज़गार रिपोर्ट की प्रतीक्षा ने कैनेडियन डॉलर को सहारा दिया।
कमजोर अमेरिकी डॉलर के सहारे सोने में अपने साप्ताहिक दायरे के भीतर मामूली बढ़त बनी हुई है, लेकिन चीन की मांग को लेकर चिंताओं के कारण इसकी आगे की तेजी सीमित है। यह धातु मजबूत सुरक्षित निवेश के रूप में भी काम नहीं कर पा रही है। इसकी एक वजह शेयरों और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो सकती है।
इस बीच, WTI क्रूड ऑयल दो महीने के निचले स्तर पर मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है और इसकी पांच दिन की लगातार गिरावट थम गई है। यह सुधार तब आया है जब ट्रेडर्स नुकसान को समेट रहे हैं और रूस, इज़राइल, गाज़ा और ईरान से जुड़े आपूर्ति जोखिमों पर नजर रख रहे हैं। हालांकि, Trump के टैरिफ से मांग घटने की आशंका और OPEC+ की बढ़ती आपूर्ति कीमतों पर दबाव बनाए हुए हैं। खास बात यह है कि अमेरिका के साप्ताहिक क्रूड इन्वेंटरी आंकड़ों में अप्रत्याशित गिरावट दिखी, लेकिन इससे तेल की कीमतों में खास बढ़त नहीं आई।
व्यापक बाजार की अनिश्चितता, क्रिप्टो ETF फंड प्रवाह में गिरावट और तकनीकी स्तर टूटने से गुरुवार की शुरुआत में Bitcoin (BTC) और Ethereum (ETH) में मामूली गिरावट आई, जबकि अमेरिकी डॉलर कमजोर था।
अमेरिका के समर्थनकारी नियामकीय कदमों के बावजूद गिरावट जारी रही। बुधवार को अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमिशन (CFTC) ने लिक्विड स्टेकिंग को मंज़ूरी दी और स्पष्ट किया कि इसे सिक्योरिटी के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाता। इससे क्रिप्टो के अनुकूल कंपनियों का उत्साह बढ़ा, लेकिन जोखिम से बचने के माहौल में कीमतें बढ़ाने के लिए यह काफ़ी नहीं था।
बुधवार को बाज़ार में हलचल रही, लेकिन डेटा कम आया। अब गुरुवार को अहम घटनाओं पर सबकी नज़र रहेगी। इनमें बैंक ऑफ़ इंग्लैंड की संभावित 0.25% ब्याज दर कटौती, अमेरिका के साप्ताहिक बेरोज़गारी भत्ते के दावे, रोज़गार लागत और वेतन के आंकड़े शामिल हैं। Fed अधिकारियों के भाषण और कनाडा का Ivey PMI भी बाज़ार को प्रभावित कर सकते हैं।
इस बीच, रूस, यूक्रेन, इज़राइल, उत्तर कोरिया, भारत और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ ट्रंप और व्हाइट हाउस के बयानों पर भी नजर बनी हुई है।
अगर रिस्क लेने की चाह कम होती है, तो अमेरिकी डॉलर में वापसी हो सकती है, जिससे GBPUSD, सोने और इक्विटी पर दबाव पड़ेगा। वहीं, बॉन्ड यील्ड में गिरावट आ सकती है और क्रिप्टो सीमित दायरे में रह सकता है।
कुल मिलाकर, गुरुवार एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। मैक्रो डेटा और भू-राजनीतिक जोखिमों से करेंसी, कमोडिटी और जोखिम वाली परिसंपत्तियों में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।
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