स्टॉक डिविडेंड यील्ड आपके पोर्टफ़ोलियो को बढ़ाना शुरू करने का एक अच्छा विकल्प है। सालाना डिविडेंड मिलने पर, निवेशक ऐसी कई कंपनियों में से चुन सकते हैं जो शेयरधारकों को मौजूदा एसेट की कीमत का एक निश्चित प्रतिशत देने के लिए तैयार हैं। हालांकि कुछ लोग इसे सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाला निवेश अवसर मानते हैं, लेकिन डिविडेंड यील्ड के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जिनके बारे में ट्रेडर्स को पता होना चाहिए।

इस लेख में आप जानेंगे कि डिविडेंड यील्ड की गणना कैसे करें और डिविडेंड देने वाले स्टॉक्स को अपने पोर्टफ़ोलियो में शामिल करने के क्या फ़ायदे और नुकसान हैं।
डिविडेंड यील्ड, स्टॉक की मौजूदा कीमत का वह प्रतिशत है जो सालाना आधार पर शेयरधारकों को दिया जाता है। इससे निवेशकों को यह जानने में मदद मिलती है कि आज चुकाई गई कीमत के बदले उन्हें कितनी आय मिलने की उम्मीद हो सकती है—यह मानते हुए कि पूरे निवेश की अवधि में डिविडेंड की राशि समान रहेगी।
हालांकि, इसका मुख्य नुकसान यह है कि डिविडेंड यील्ड बदल सकती है। ऐसा कंपनी के प्रतिशत को बढ़ाने या घटाने के फ़ैसले के कारण हो सकता है। बाज़ार में उतार-चढ़ाव भी इसका एक कारण हो सकता है। दूसरे शब्दों में, डिविडेंड में बदलाव हमेशा बाज़ार की चाल से जुड़ा नहीं होता। फिर भी, यह स्टॉक ट्रेड का मूल्यांकन समझने और आपकी आय संबंधी प्राथमिकताओं के मुताबिक एसेट ढूँढ़ने के लिए एक उपयोगी मेट्रिक हो सकता है।



डिविडेंड यील्ड का फ़ॉर्मूला, डिविडेंड भुगतान के तरीके पर निर्भर करता है। कुछ कंपनियाँ शेयरधारकों को हर महीने भुगतान करना पसंद करती हैं। अन्य कंपनियाँ तिमाही, छमाही या सालाना भुगतान करती हैं। यील्ड की गणना करने के लिए, एक भुगतान से हुई आपकी आय को साल में किए जाने वाले भुगतानों की संख्या से गुणा करें (तिमाही भुगतान के लिए 4, मासिक भुगतान के लिए 12, वगैरह)।
भुगतान के सबसे अच्छे शेड्यूल की बात करें, तो कुछ निवेशक तेज़ी से भुगतान पाना पसंद करते हैं और मासिक डिविडेंड चुनते हैं। हालांकि, सभी कंपनियाँ ऐसा नहीं करतीं। आपको रियल एस्टेट या REIT श्रेणी की कंपनी चुननी होगी। कुछ खास टैक्स फ़ायदों की वजह से, इस तरह के कारोबार शेयरधारकों को औसत से अधिक डिविडेंड दे सकते हैं।
हर शेयर डिविडेंड की तरह, निवेशकों को यह बात स्पष्ट रूप से समझनी चाहिए कि ज़्यादा डिविडेंड यील्ड का मतलब यह ज़रूरी नहीं कि निवेश का अच्छा अवसर हो। अच्छा प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को भी कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
डिविडेंड के जाल – ज़्यादा डिविडेंड यील्ड कभी-कभी कंपनी की परेशानियों का संकेत हो सकती है। कुछ उद्योगों में कारोबार कम विकास और विस्तार की संभावनाओं के कारण ज़्यादा यील्ड देते हैं। इसके अलावा, अगर कंपनी की यील्ड उसके निकटतम प्रतिस्पर्धियों की यील्ड से काफ़ी ज़्यादा है, तो कंपनी में निश्चित रूप से कुछ गड़बड़ है।
एक ओर, शेयरों की डिविडेंड यील्ड आपके पोर्टफ़ोलियो में विविधता लाने का अच्छा तरीका हो सकती है। हालाँकि, आपको सिर्फ़ इसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ध्यान रखने लायक कुछ अहम फ़ायदे और नुकसान यहाँ दिए गए हैं।
फ़ायदे: सबसे पहले, डिविडेंड यील्ड से यह समझने में मदद मिल सकती है कि कंपनी का प्रदर्शन कैसा है और उसमें निवेश करना सही होगा या नहीं। एक आसान फ़ॉर्मूले से पता लगाया जा सकता है कि कंपनी अपने शेयरधारकों को भुगतान जारी रख पाएगी या नहीं। इसके अलावा, नए निवेशकों के लिए यह शुरुआत करने का अच्छा तरीका हो सकता है। साथ ही, पुराने आँकड़ों और कंपनी के प्रदर्शन पर नज़र रखकर किसी एसेट का मूल्यांकन करने में भी इससे मदद मिलती है।
नुकसान: दुर्भाग्य से, कई नए निवेशक सिर्फ़ यील्ड पर भरोसा करते हैं और उसका गलत इस्तेमाल करते हैं। कुछ निवेशक कंपनी चुनते समय सही फ़ैसला नहीं कर पाते, क्योंकि वे उन बातों पर ध्यान नहीं देते जिनका हमने पहले ज़िक्र किया है। इन्हें नज़रअंदाज़ करना बड़ी गलती हो सकती है।
इसके अलावा, आजकल डिविडेंड यील्ड के जाल आम होते जा रहे हैं। इसलिए, आप चाहे जिसमें भी निवेश करें, अपनी पूरी पूँजी कभी न लगाएँ और संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए ज़रूरी सावधानियाँ बरतें।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।