जिन लोगों ने कभी मोमेंटम ट्रेडिंग रणनीतियों का इस्तेमाल किया है, वे उनसे जुड़े सभी जोखिमों से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं। साथ ही, ये रणनीतियाँ ट्रेडर्स को ऐसे खास सेक्टरों की तेज़ी से और सटीक पहचान करने में मदद करती हैं, जिनमें संभावित मुनाफ़े की गुंजाइश हो सकती है।

मोमेंटम ट्रेडिंग करने वाले लोग हर छोटे से छोटे मौके का फ़ायदा उठाने और ETF तथा शेयरों की ट्रेडिंग करते समय ऊपर और नीचे, दोनों तरह के ट्रेंड से ज़्यादा से ज़्यादा लाभ लेने की कोशिश करते हैं। ट्रेडिंग की एक पुरानी कहावत है, “ट्रेंड आपका दोस्त है”। ट्रेंड के साथ चलना ही वह चीज़ है जिसे हम सभी तलाशते हैं। मोमेंटम ट्रेडिंग वह ताकत बन सकती है जो इन ट्रेंड को उसी दिशा में आगे बढ़ाती रहे।
आज हम बिना किसी खास कौशल या अनुभव के मोमेंटम ट्रेडिंग रणनीतियों का इस्तेमाल करने के कुछ सबसे आसान तरीके बताएंगे।
इस तकनीक का इस्तेमाल करते समय, आपको उन शेयरों और ETF की कीमतों पर नज़र रखनी चाहिए जो ऊपर जा रही हैं। आपको ऐसे ट्रेंड की पहचान करनी होगी जो हर दिन और हफ़्ते दर हफ़्ते उसी दिशा में बढ़ता रहे। कुछ मामलों में, यह बिना किसी रुकावट के कई महीनों या उससे भी ज़्यादा समय तक चल सकता है।
कुछ लोग नई ऊँचाइयाँ बना रहे बाज़ार में एंट्री करने से डरते हैं। लेकिन मोमेंटम ट्रेडर के तौर पर आपको ऐसे बाज़ारों पर नज़र रखनी चाहिए। ऐसे में ट्रेंड या कीमत के नई ऊँचाइयाँ बनाने की पुष्टि के लिए अतिरिक्त संकेतों और सबूतों की ज़रूरत होती है।



मोमेंटम ट्रेडिंग रणनीतियों को लागू करते समय हर ट्रेड में वोलैटिलिटी का स्तर ऊँचा होना चाहिए। इस रणनीति का मुख्य विचार बाज़ार में बढ़ती वोलैटिलिटी से मुनाफ़ा कमाना है। अगर आप अपने शॉर्ट और लॉन्ग ऑर्डर का समय सही ढंग से तय नहीं कर पाते, तो इससे बड़ा नुकसान हो सकता है। इसीलिए जोखिम प्रबंधन के अलग-अलग टूल और खास तौर पर स्टॉप लॉस ऑर्डर इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी है।
ट्रेडर ट्रेंड पहचानने के लिए कई तरीके अपना सकते हैं। अगर आप आम तौर पर ETF और स्टॉक्स में ट्रेड करते हैं, तो 52-सप्ताह के उच्च स्तर से 10% के दायरे में ट्रेड किए गए एसेट का प्रतिशत देख सकते हैं। दूसरा तरीका यह है कि पिछले 12-24 हफ़्तों में इस प्रतिशत में हुए बदलाव पर नज़र रखें। हाल की कीमतों में हुए उतार-चढ़ाव पहचानने के लिए ये दोनों तरीके काफ़ी संवेदनशील और सटीक हैं।
कुछ ट्रेडर कम समय-सीमा पर भरोसा करते हैं। वे कीमतों के ट्रेंड और बदलते पहलुओं को देखने के लिए छोटी अवधि का इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए, पहले बताई गई 12 या 24 हफ़्तों की अवधि के बजाय वे 1-4 हफ़्तों के बदलाव को देखते हैं। हालाँकि, इससे आप जिस एसेट में ट्रेड कर रहे हैं, उससे बाहर निकलना पड़ सकता है।
अगर आप एक सफल मोमेंटम ट्रेडर बनना चाहते हैं, तो आपको सबसे अच्छे सेक्टर जल्द से जल्द पहचानने के कुछ आज़माए हुए तरीके सीखने होंगे। इसमें सिर्फ़ तेज़ी ही नहीं, सटीकता भी ज़रूरी है। इसके लिए ये कदम आपके काम आ सकते हैं:
आपको यह साफ़ तौर पर समझना चाहिए कि मोमेंटम ट्रेडिंग में काफ़ी जोखिम होता है। ट्रेडर आम तौर पर खरीदारी के हालिया डेटा के आधार पर फ़ैसले लेते हैं। खरीदारी का दबाव कीमत को ऊपर ले जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। हमेशा यह संभावना रहती है कि पहले से खुली पोज़िशन पर मुनाफ़ा कमाने की होड़ नए खरीदारों पर हावी हो जाए। इससे कीमत गिर सकती है।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।