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पिछले दिन के हाई-लो ब्रेकआउट रणनीति का इस्तेमाल कैसे करें

पिछले दिन की हाई-लो ब्रेकआउट रणनीति डे ट्रेडिंग की एक तकनीक है, जो ट्रेडरों को लॉन्ग या शॉर्ट पोज़िशन लेने के कई मौके देती है। इसका मुख्य विचार ट्रेंडिंग मूव शुरू होने से पहले, ट्रेंड के सबसे मज़बूत चरण की पहचान करना है। किसी भी दूसरी डे ट्रेडिंग रणनीतिकी तरह, पिछले दिन की हाई-लो ट्रेडिंग रणनीति में सीमित समय के भीतर टेक्निकल एनालिसिस के कई डेटा पॉइंट्स को प्रोसेस करना पड़ता है। इसलिए, इसमें मुनाफ़े की अच्छी संभावना होने के बावजूद, शुरुआती लोगों के लिए यह काफ़ी जटिल हो सकती है।

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आज हम इस रणनीति के सभी फ़ायदों और नुकसानों के साथ-साथ वास्तविक बाज़ार स्थितियों में इसका इस्तेमाल करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।

पिछले दिन की हाई-लो ब्रेकआउट रणनीति कैसे काम करती है

यह विचार काफ़ी सरल है। इस रणनीति में ट्रेडरों को अब 5 से 10 दिनों की रेंज पर नज़र रखने की ज़रूरत नहीं होती। इसके बजाय, वे पिछले दिन की हाल की रेंज के लो और हाई पर ध्यान देते हैं। दिन भर किसी एसेट की ट्रेडिंग करने वाले बाज़ार प्रतिभागियों के आधार पर हर स्टॉक की अपनी एक खास चाल होती है। वहीं, बियर और बुल दोनों ही ऐसी खास ट्रेडिंग सीमाएँ तय करते हैं, जो किसी स्टॉक को एक विशेष दिशा में बढ़ने से रोकती हैं।

पिछले दिन की ब्रेकआउट रणनीति का मकसद इन रेंज पर नज़र रखना और उनका फ़ायदा उठाते हुए लॉन्ग या शॉर्ट पोज़िशन के साथ बाज़ार में एंट्री करना है। इस रणनीति का इस्तेमाल करने के लिए ट्रेडरों को इन शर्तों को पूरा करना चाहिए:

  1. पिछले दिन के हाई और लो की प्राइस रेंज पहचानें।
  2. पिछले दिन की रेंज की दो दिन पहले की रेंज से तुलना करने के लिए 2 दिनों के ऐतिहासिक डेटा का इस्तेमाल करें। इससे आप अनियमित रेंज से बच सकेंगे।
  3. अगर मौजूदा ब्रेकआउट पिछले दिन की रेंज से कम-से-कम 10% बड़ा है, तो आप बाय या सेल पोज़िशन लेकर मार्केट में एंट्री कर सकते हैं।
  4. अगर आप ट्रेड से बचना या उसे रोकना चाहते हैं, तो मूविंग एवरेज का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक तरीका यह हो सकता है कि तय किया गया प्राइस लेवल पहुँचने पर शॉर्ट पोज़िशन लें।
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पिछले दिन के हाई और लो की रणनीति: फ़ायदे और नुकसान

हर ट्रेडिंग रणनीति की तरह, पिछले दिन के हाई और लो पर आधारित इस तरीके के भी कुछ फ़ायदे और नुकसान हैं। आपको हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि इस रणनीति का इस्तेमाल मुख्य रूप से शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए किया जा सकता है।

फ़ायदे:

  • कई ट्रेडर इस रणनीति का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही मार्केट वोलैटिलिटी पर ध्यान देते हैं; ज़्यादातर इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। $2 की रेंज के $10 तक पहुँचने का इंतज़ार करने का कोई मतलब नहीं है।
  • एंट्री लेवल उतने स्पष्ट नहीं होते, जितने वे दिख सकते हैं। कभी-कभी ये ट्रेडर्स की नज़र से छिपे रहते हैं। वहीं, इसी तरह की दूसरी रणनीतियों की तुलना में, इस रणनीति में हाई और लो कम स्पष्ट होते हैं।

नुकसान:

  • यह रणनीति जटिल है, क्योंकि लक्ष्य के करीब पहुँचते समय हर सेंट मायने रखता है। इसके अलावा, फ़र्ज़ी या भ्रामक सिग्नल से बचने के लिए आपको सिग्नल की पुष्टि की ज़रूरत हो सकती है।

इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।