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मार्केट साइकल और फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में इसका महत्व

फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में कीमत बेतरतीब ढंग से ऊपर या नीचे जा सकती है। यही बात दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स और एसेट्स पर भी लागू होती है। टेक्निकल एनालिसिस करने वाले ट्रेडर्स जानते हैं कि बाज़ार में कुछ स्पष्ट और बार-बार दोहराए जाने वाले चरण होते हैं, जिन्हें मार्केट साइकल भी कहा जाता है। यह बाज़ार की प्रमुख चालों को दर्शाता है, जो सफल ट्रेडिंग के लिए बड़े संस्थागत निवेशकों के काम करने के तरीके को प्रभावित करती हैं।

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बाज़ार के लाइफ़ साइकल पर व्यक्तिगत निवेशकों को नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें बाज़ार की अगली चालों का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। इस लेख में, हम बाज़ार की चाल के सभी चरणों और उन पर बारीकी से नज़र रखना क्यों ज़रूरी है, यह बताएँगे।

मार्केट साइकल के 4 प्रमुख चरण

मार्केट साइकल के 4 प्रमुख चरण होते हैं। ये हैं:

  1. एक्यूम्युलेशन या विस्तार।
  2. मार्कअप या शिखर।
  3. डिस्ट्रिब्यूशन या संकुचन।
  4. मार्कडाउन या निचला स्तर।

यह स्थिति बिज़नेस साइकल से काफ़ी मिलती-जुलती है, हालाँकि इसमें कुछ ख़ास अंतर और ध्यान में रखने योग्य कारक हैं। आइए, मार्केट साइकल के हर चरण को बारीकी से समझें।

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एक्यूम्युलेशन

अर्थव्यवस्था के बढ़ने के साथ बाज़ार में विस्तार होता है। नतीजतन, बाज़ार में तेज़ी का माहौल बन सकता है और ज़्यादातर निवेशक किसी अंतर्निहित एसेट को खरीदना चाहते हैं। सही आर्थिक कदम और उपाय किए जाएँ, तो यह चरण कई साल तक चल सकता है।

मार्कअप

जब खरीदारी का दबाव अपने शिखर पर पहुँचता है, तो अगला चरण शुरू होता है, जिसे मार्कअप भी कहते हैं। इस चरण में निवेशक उन एसेट्स को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाते जिनकी कीमत सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच चुकी होती है। इस दौरान बाज़ार संकुचन (डिस्ट्रिब्यूशन) के चरण में प्रवेश करता है।

डिस्ट्रिब्यूशन

अगला चरण बाज़ार में कमज़ोरी से जुड़ा होता है। विशेषज्ञ इस साइकल को मंदी भी कहते हैं। आख़िरकार यह बाज़ार के लाइफ़ साइकल के अंतिम चरण तक पहुँचता है।

मार्कडाउन

सबसे निचले चरण में बाज़ार अपने न्यूनतम संभावित स्तर पर पहुँच जाता है। इस चरण में एक नया साइकल शुरू होता है और आख़िरकार बाज़ार फिर से विस्तार के चरण में प्रवेश करता है।

मार्केट साइकल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

मार्केट साइकल कई स्वाभाविक कारकों से प्रभावित होता है। इस पर मुख्य रूप से कई व्यापक आर्थिक कारकों का असर पड़ता है, जिनमें शामिल हैं:

  • महँगाई दर।
  • आर्थिक विकास।
  • ब्याज दरें।
  • बेरोज़गारी का स्तर।

अगर ब्याज दर घटती है, तो बाज़ार ऊपर जा सकता है और आर्थिक विकास के अगले स्तर तक पहुँच सकता है। वहीं, महंगाई में बढ़ोतरी ब्याज दर बढ़ने का संकेत है। इसका मतलब है कि आर्थिक विकास धीमा हो रहा है और मंदी आने वाली है।

इसके अलावा, निवेशक बाज़ार चक्र के किसी खास चरण का पता लगाने के लिए बाज़ार के रुझान का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह तब बहुत अहम है, जब आप उस अवधि की पहचान करना चाहते हैं जिसमें निवेशक किसी खास एसेट को खरीदने के लिए होड़ कर रहे हों, या उस चरण की जब बाज़ार में घबराहट फैलने से निवेशक अपने इंस्ट्रूमेंट्स में बड़ी मात्रा में शॉर्ट पोज़िशन लेने लगें।

एसेट की वैल्यू पर बाज़ार चक्रों का प्रभाव

एक सफल निवेशक बनने के लिए, आपको ऐसी फ़ॉरेक्स रणनीतियाँ अपनानी होंगी जो बाज़ार की अलग-अलग स्थितियों में अच्छी तरह काम करें। इसके अलावा, आपके पास ऐसा तरीका भी होना चाहिए जिससे आप मौजूदा प्राइस ऐक्शन का फ़ायदा उठा सकें। कुछ विशेषज्ञ एलियट वेव थ्योरी का पालन करते हैं। वहीं, कुछ लोग बाज़ार का पूर्वानुमान लगाने और कीमतों के उच्चतम व न्यूनतम स्तर पहचानने के लिए खास MT4 टूल्स का इस्तेमाल करते हैं।

मुख्य विचार उस अवधारणा का पालन करना है जिसके अनुसार, “हर क्रिया की प्रतिक्रिया विपरीत या बराबर होती है”। दूसरे शब्दों में, अगर किसी एसेट की वैल्यू घटती या बढ़ती है, तो इसके बाद कीमत में विपरीत दिशा में हलचल जारी रहेगी।

बाज़ार चक्र का अंत

हर बाज़ार चक्र की अवधि लगभग समान होती है, हालांकि ज़रूरी नहीं कि वह बिल्कुल समान हो। अगर कोई चरण औसत अवधि का 1/6 भी हो, तब भी उसे एक अलग चक्र से जोड़ा जा सकता है। नया चरण शुरू होने पर एक चक्र समाप्त होता है। इसलिए, अगर आप एक चक्र से दूसरे चक्र में बदलाव के चरण को पहचान सकें, तो ट्रेंड की संभावित दिशा का अनुमान लगा सकते हैं।

बाज़ार चक्र की अवधि

जैसा कि पहले बताया गया है, अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए सभी ज़रूरी कदम और उपाय किए जाएँ, तो कुछ चक्र कई साल तक चल सकते हैं। असल में, कुछ चरण कई हफ़्तों तक चल सकते हैं, जबकि दूसरे कई साल तक जारी रह सकते हैं। कुल अवधि कई बुनियादी आर्थिक कारकों और संबंधित बाज़ार के खास मापदंडों पर निर्भर करती है।

इसके अलावा, आपकी फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग शैली भी बाज़ार चक्र की अवधि तय कर सकती है। फ़ॉरेक्स डे ट्रेडिंग करते समय, आप एक हफ़्ते से भी कम समय में कई चक्र देख सकते हैं, उदाहरण के लिए, 15-मिनट के चार्ट पैटर्न का इस्तेमाल करते हुए। इसके उलट, स्विंग ट्रेडर्स के लिए अगले कुछ हफ़्तों में पूरा चक्र समाप्त होते देख पाना मुश्किल हो सकता है। अगर आप रियल एस्टेट बाज़ार में निवेश करते हैं, तो आपको अगला चरण दशकों या उससे भी ज़्यादा समय तक देखने को नहीं मिल सकता।

बाज़ार चक्र के इंडिकेटर्स

टेक्निकल एनालिसिस बाज़ार की लगभग किसी भी स्थिति का अनुमान लगाने के लिए टूल्स देता है। निवेशक इनका इस्तेमाल बाज़ार के खास चक्रों का पता लगाने के लिए भी कर सकते हैं। CCI, DPO और दूसरे टूल्स संबंधित बाज़ार की चक्रीय प्रकृति को समझने में बहुत असरदार हो सकते हैं।

अगर आप कमोडिटीज़ में ट्रेड करते हैं, तो CCI बहुत उपयोगी है। यह स्टॉक्स और फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग करने वालों के लिए भी काम का है। DPO इंडिकेटर ओवरसोल्ड और ओवरबॉट बाज़ार स्थितियों की पहचान करने का एक टूल है। इसके अलावा, यह पता लगाने में भी मदद करता है कि बाज़ार का कोई खास चक्र कब समाप्त होकर अगले चक्र में बदलता है।

निष्कर्ष

बाज़ार चक्रों को समझने और उनकी पहचान करने की क्षमता हर निवेशक के लिए बहुत अहम है। इससे आपको करेंसी, कमोडिटीज़, क्रिप्टो और दूसरे बाज़ारों में ट्रेडिंग करते समय अधिकतम रिटर्न पाने में मदद मिलेगी। यह अवधारणा उन लोगों के लिए भी बहुत अहम है जो CFDs और डेरिवेटिव्स में ट्रेड करते हैं। इस तरह, बाज़ार के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखकर यह तय किया जा सकता है कि रणनीति के अनुसार लॉन्ग या शॉर्ट पोज़िशन लेने का सही समय कब है।

इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।