
मंगलवार के ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत तेल की मिली-जुली कीमतों के साथ हुई। ब्रेंट 78.06 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था (0.14% ऊपर), जबकि US WTI 0.17% गिरकर 72.35 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
ईरान-समर्थित उग्रवादियों के हमलों के जोखिम के कारण तेल टैंकरों के लाल सागर से गुजरने से इनकार करने के बाद यह स्थिति पैदा हुई। शिपिंग कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में आई बाधाओं से निपटना पड़ रहा है। लाल सागर के रास्तों से गुजरते समय कई वाणिज्यिक जहाज़ों पर ड्रोन से हमलों की एक श्रृंखला हुई।
नुकसान से बचने के लिए Maersk और Evergreen जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने जोखिम वाले क्षेत्र से अपने जहाज़ों की आवाजाही रोकने का फ़ैसला किया। BP Oil जैसी अन्य बड़ी शिपिंग और तेल कंपनियां भी स्वेज़ नहर से परिवहन रोकने की पहल में शामिल हो गईं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में उथल-पुथल मच गई, क्योंकि तेल की कुल मांग का 9% हिस्सा लाल सागर से होकर गुज़रता था।



विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में आई उथल-पुथल का Brent पर बहुत ज़्यादा असर पड़ा। इस मंगलवार इसकी कीमत 0.14% बढ़कर ट्रेड हुई। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर दूसरी कमोडिटीज़ पर भी पड़ सकता है, जिनमें कॉफी, पाम ऑयल, सोयाबीन और निकेल शामिल हैं। गैर-तेल कमोडिटीज़ का 12% हिस्सा भी स्वेज़ नहर से होकर ले जाया जाता है।
Goldman Sachs के विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बाधा का असर लंबे समय तक रहने की संभावना नहीं है और यह मुख्य रूप से LNG या कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करता है। शिपिंग कंपनियाँ वैकल्पिक मार्ग तय कर रही हैं, ताकि इस स्थिति का उत्पादन पर सीधा असर न पड़े।
इसके अलावा, अमेरिका ने लाल सागर की स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री अभियान शुरू करने की घोषणा पहले ही कर दी है। ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, नॉर्वे और कुछ अन्य देश इस सुरक्षा पहल में पहले ही शामिल हो चुके हैं।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!